“उत्तराखंड एक रेकॉरिंग landslide स्टेट “
Prof .H.P.Bhatt
Ex Director campus
Ex HOD Geography
Ex Dean Earth Sciences
HNB Garhwal central university, srinagar
यह सत्य है कि सडकें विकास का एक प्रमुख आधार है इसलिए इन्हें “टूल आफ़ बिल्डिंग कंट्री ” कहा जाता है। परंतु उत्तराखंड के पहाड़ों पर जो नवीन सड़कों का निर्माण और इनका चौड़ीकरण का कार्य चल रहा है । खास तौर से जिसमें चार धाम यात्रा मार्ग महत्वपूर्ण है के फल स्वरूप प्राकृतिक आपदाएं खास तौर से भूसखलन की स्थिति तिव्रता से काई गुनी बढ़ रही है और निकट भविष्य में यह भयावह रूप धारण करने वाले हैं l
(मेरा विचार चार धाम यात्रा सड़क और ऋषिकेश कर्ण प्रयाग रेलवे लाइन के निर्माण की आलोचना या उसमे खामियां निकालना नहीं हे ब्लकि जो मैने अध्ययन और ऑब्जर्व किया उसकी ओर ध्यान आकर्षित करना मात्र हे )।
चार धाम यात्रा मार्ग या अन्य सड़कों का जो चौड़ीकरण किया जा रहा है उसके फल स्वरूप :
सड़क के दोनों किनारे प्रभावित हैं । पहाड़ की तरफ का ढाल बढ़ गया हैं जिस से मलवा की मात्रा और गिरने की गति कई गुना बढ़ गया है l क्यों की चौड़ीकरण के कारण ढाल कई गुना लगभग 8o डिग्री तक बढ़ गया है जिसके स्वरूप वहां से मलवा का गिरने की मात्रा और तीव्रता बढ़ गई है और उसी समानुपात में आने की संभावना भी बढ़ गई है तथा ऐसl हो भी रहा है उदाहरण के तौर पर की अगर 10 फीट लंबी, 30 फीट चौड़ी और 20 फीट ऊंची सड़क पर से जो मलवा निकलेगा वह 218 क्यूबिक यार्ड होगा ।इसी प्रकार संपूर्ण सड़क की लंबाई के अनुसार देखे तो आयतन कितना जादा होगा ।और इसको फेंकने से कितना और किया प्रभाव पड़ेगा ये सब कुछ प्रभाव दिख रहे हैं। चौड़ीकरण के फल स्वरुप जो मलवा निचली हिस्सों मैं फेंका जा रहा हे उसके द्वारा भी भुसखलन बढ़ा है उस से सड़क के निचले हिस्से में चाहे वह नदी का भाग हो या चाहे वह कोई बस्ती हो? या खेत हो उनको भी अत्याधिक नुक्सान हुआ हे तथा हो रहा हैं और फ्यूचर में अत्याधिक खतरा होगा। पहले सड़के block होती थीं किन्तु अब वास आउट हो रहीं हैं या बृहद पैमाने पर धंस जा रहीं हैं।
इसे ‘ भूस्खलन से भूस्खलन ‘ कहा जा सकता है। चार धाम रोड के चौड़ीकरण के लिए भी अधिक कटिंग और अधिक debris निकल रही है i इनके लिए जगह जगह डंपिंग जॉन बना दिए गए हैं अगर इन डंपिंग जोन्स का ढंग से उचित प्रबंधन और इनमें वृक्षारोपण न किया गया और इसमें कोई मानवीय गतिविधया बढ़ा दी गई तो यह उत्तराखंड के लिए विनाश का कारण बन सकते हैं एक तरह से यह भविष्य में होने वाले भूस्खलन के मानव कृत केंद्र कहे जाएंगे ।
चार धाम यात्रा सड़क के कारण भूस्खलन की आवृति और गहनता सामान्य से कहीं अधिक बढ़ गयी है जल प्रवाह में परिवर्तन हुआ है , वहां का इको सिस्टम भी प्रभावित हुआ है । लगभाग हर पांच किलो मीटर की दूरी पर2 से लेकर 3 नए भूस्खलन साइट बन गए हैं और पुरानी साइट पर भुसखलन की गहनता और आवृति बढ़ी है। जहां पर भूस्खलन काफी समय से शांत था या उसमें कोई क्रिया नहीं हो रही थी वह चौड़ीकरण के कारण पुनः जागृत हो गए हैं और अत्याधिक मात्रा में उनसे भूस्खलन हो रहा है।जहां तक इन सड़कों के बनने से लाभ का सवाल है तो भविष्य ही बताएगा लेकिन अभी तक जो सड़क के किनारे जो छोटे व्यापारी हैं उनको बहुत बड़ा कोई लाभ नहीं होता दिख रहा है निर्माणाधीन कर्णप्रयाग- ऋषिकेश रेल मार्ग का भी पर्यावरणीय प्रभाव विश्लेषण के मानकों के आधार पर समुचित प्रबंधन प्रारंभ से ही करना होगा अन्यथा यह भी भविष्य में एक भारी समस्या होगी। त्तराखंड को land आफ़ landslides का राज्य कहां जा सकता है क्योंकि यहां यह आपदा लगlतर बढ़ती जा रही है 889 किलोमीटर चार धाम यात्रा सड़क मुख्य रूप से लम्बाई के हिसाब से उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग,टिहरी और चमोली में सर्वाधिक हे और ये ही चार जिले बर्तमान में सर्वाधिक /मुख्यतह बरसा एवं भूस्खलन से प्रभावित जिले हैं चार धाम यात्रा सड़क के कारण इनकी स्थिति और भी गंभीर हो गई है और भविष्य संकट ग्रस्त रहेगा। जो कि चिंतनीय है
उत्तराखंड राज्य का उत्तरी भाग 30 डिग्री से 31 डिग्री उत्तर अक्षांश के मध्य में है इसी अक्षांशय विस्तार क्षेत्र में उत्तराखंड में भारी बरसात एवं भुसखलन पूर्व में भी हुआ है और वर्तमान में भी हो रहा है कारण यहां की जो पर्वत श्रृंखलायें है, उनका अधिकांश फेलाव उत्तर पूर्व से दक्षिण पश्चिम की तरफ है अर्थात यहां बरसा छाया प्रदेश भी नहीं है ।वैसे भी विश्व स्तर पर ग्लोबल वार्मिंग , हिंद महासागर dipole, पश्चिमी विक्षोभ और lanino के संयुक्त प्रभाव के फल स्वरूप भारत के उत्तरी और उत्तरी पश्चिम भाग पर अधिक बरसा हो रहीं हैं । उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, एवं जम्मू -कश्मीर उदाहरण है।
उत्तराखंड रेकॉरिंग landslide स्टेट बन गया हे जिसका नियोजन प्राकृतिक दशाओं की सीमाओं के दायरे में रह कर ही उचित सर्वोपरि एवं सर्वग्राही होगा तभी यहां के निवासियों की रक्षा हो पाएगी ।अन्यथा आउट migration की मार से पीड़ित राज्य पर आपदाओं के कारण फोर्सड migration के कारण इसके कुछ भाग जनसुनय हो जाएंगे